पहले से मौजूद फ़ोटो से AI प्रोडक्ट फ़ोटो
ज़्यादातर छोटे सेलर के पास प्रोडक्ट के दो-चार फ़ोन फ़ोटो होते हैं। नुक़सान अक्सर प्रोडक्ट से नहीं, पीछे के सॉकेट और पीली लाइट से होता है।
टेम्पलेट उसी फ़ोटो पर रोशनी और बैकग्राउंड दोबारा बनाते हैं: स्टूडियो बैकड्रॉप, सफ़ेद बैकग्राउंड, या कपड़े से निकाला प्रिंट। सोर्स धुँधली हो तो दोबारा शूट करना तेज़ है।
किस काम के लिए कौन-सा टेम्पलेट
चारों टेम्पलेट अलग कामों के लिए हैं और एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते: स्टूडियो शॉट दूसरी-तीसरी इमेज, सादा बैकग्राउंड मुख्य इमेज।
पैटर्न एक्सट्रैक्शन छपी डिज़ाइन दोबारा बनाता है, जो कपड़े और पैकेजिंग में काम आता है। ब्रांड टेम्पलेट एक फ़ोटो से पैलेट और फ़ॉन्ट सैंपल बना देता है।
यह तब चलता है जब सोर्स शार्प हो और प्रोडक्ट फ़्रेम में पूरा हो। नक्काशी, सिलाई या कपड़े का सटीक रंग जहाँ ज़रूरी है, वहाँ यह ग़लत औज़ार है।
फ़ोन गैलरी से लिस्टिंग तक का क्रम
तय कीजिए कि चाहिए क्या: साफ़ मुख्य इमेज, सीन शॉट या सिर्फ़ पैटर्न। एक सोर्स से कई वर्ज़न बनते हैं, पर हर बार एक ही चीज़ बदलिए।
- सोर्स फ़्रेम चुनिए। सबसे शार्प वाला, जिसमें प्रोडक्ट पूरा अंदर हो और चारों तरफ़ थोड़ी खाली जगह हो; फिर 100% ज़ूम करके लेबल, लोगो और मटीरियल की बनावट जाँचिए। बैकग्राउंड साफ़ है या नहीं, यह चुनाव का पैमाना नहीं है।
- अपलोड से पहले ख़ुद क्रॉप कीजिए। मेज़ का किनारा, उँगलियाँ और भटका हुआ पैकेट हटाइए, प्रोडक्ट सीधा कीजिए, और सबसे बड़े साइज़ में एक्सपोर्ट कीजिए। पहले कंप्रेस करने से ठीक वही बारीक किनारे चले जाते हैं जो टेम्पलेट को चाहिए।
- टेम्पलेट नतीजे के हिसाब से चुनिए, प्रोडक्ट के हिसाब से नहीं। रोशनी वाले सीन के लिए स्टूडियो शॉट, सिर्फ़ डिज़ाइन चाहिए तो पैटर्न एक्सट्रैक्शन, और पूरी ब्रांड पहचान के लिए ब्रांड लेआउट।
- डिस्क्रिप्शन का बॉक्स हो तो ठोस बात लिखिए: सतह क्या है, रोशनी किस तरफ़ से आ रही है, शैडो हार्ड है या सॉफ़्ट। प्रीमियम जैसे शब्द कोई जानकारी नहीं देते, मॉडल अंदाज़ा लगाने लगता है।
- नतीजे को 100% पर देखिए और तीन चीज़ें इसी क्रम में जाँचिए: प्रोडक्ट की आउटलाइन, लेबल की लिखाई, और रिफ़्लेक्शन व शैडो। लेबल ज़ोर से पढ़िए, क्योंकि अक्षर मिल जाना या बदल जाना सबसे आम ख़राबी है।
- एक हिस्सा गड़बड़ हो तो बार-बार पैच करने के बजाय दोबारा चलाइए। क्रॉप बदलिए या डिस्क्रिप्शन छोटा कीजिए। एक ही फ़ाइल पर बार-बार लोकल सुधार बनावट को धुँधला कर देते हैं।
पूरा बैच एक ही दुकान जैसा दिखे
कैटेगरी पेज पर ख़रीदार कई थंबनेल एक साथ देखता है। कलर टोन और शैडो अलग हो तो इमेजें अलग दुकानों का माल लगती हैं।
- एक बैच एक ही बैठक में शूट कीजिए: वही कमरा, वही लैंप, वही दूरी और ऊँचाई, ताकि बने हुए बैकग्राउंड और शैडो आपस में मेल खाएँ।
- 100% पर किनारे और रिफ़्लेक्शन देखिए। पारदर्शी बोतल, चमकदार डिब्बे, धातु और गहरे बैकग्राउंड पर गहरा प्रोडक्ट, यहीं आउटलाइन सबसे पहले खोती है। प्रोडक्ट रखा हुआ लगे या चिपकाया हुआ, यह उसकी सिलुएट और नीचे के रिफ़्लेक्शन से तय होता है।
- हर लेबल ज़ोर से पढ़िए। छोटा टेक्स्ट कॉपी नहीं होता, दोबारा लिखा जाता है, इसलिए अक्षर मिल या बदल सकते हैं। लेबल ही बिक्री की बात हो तो मुख्य इमेज पर असली फ़ोटो रखिए और जनरेट की गई इमेज आगे की स्लॉट में।
- दो-तीन स्टाइल चुनकर उन्हीं पर टिकिए। हर प्रोडक्ट के लिए अलग बैकग्राउंड बेतरतीब लगता है, जबकि पूरी रेंज का एक बैकग्राउंड ब्रांड जैसा दिखने लगता है।
- सबसे पहले प्लेटफ़ॉर्म के नियम देखिए। ज़्यादातर मार्केटप्लेस मुख्य इमेज पर सादा सफ़ेद या हल्का बैकग्राउंड चाहते हैं, प्रोडक्ट फ़्रेम का बड़ा हिस्सा भरता हो, और कोई टेक्स्ट, वॉटरमार्क, बॉर्डर या प्रॉप न हो। हर प्रोडक्ट का एक नियम-अनुरूप वर्ज़न अलग रखिए।
कहाँ गड़बड़ होती है
ज़ंज़ीर, ज़िप या रेडिएटर की पट्टियों जैसी पतली बनावटें जुड़ी हुई लौटती हैं। पैकेजिंग की लिखाई बदल जाती है और चमकदार चीज़ें पुराने बैकग्राउंड का रिफ़्लेक्शन रख लेती हैं।
गड़बड़ हो तो पीछे हटिए: क्रॉप कसकर कीजिए, या पुराना बैकग्राउंड रखकर सिर्फ़ रोशनी और शैडो ठीक कीजिए। पहले एक इमेज सही निकालिए, फिर वही सेटिंग बाक़ी पर।
असली फ़ोटो और हर जनरेट की गई फ़ाइल की एक बिना-छुई कॉपी रखिए। रंग की शिकायत, रिटर्न और मार्केटप्लेस की जाँच उसी पहली फ़ोटो से सुलझती है।
फ़ाइल बन जाने के बाद
जनरेट फ़ाइलें आम तौर पर हज़ार से दो हज़ार पिक्सल की होती हैं: लिस्टिंग के लिए ठीक, प्रिंट के लिए कम। पहले इमेज पूरी कीजिए, अपस्केल सबसे आख़िर में।
सादा और स्टाइल वर्ज़न अलग रखिए। फ़ाइल के नाम में SKU और मक़सद लिखिए, और हर इमेज वाली डिस्क्रिप्शन नोट कीजिए।
सामान्य प्रश्न
- फ़ोन कैमरे की फ़ोटो चलेगी?
- चलेगी, बशर्ते फ़्रेम शार्प हो और प्रोडक्ट पूरा अंदर हो। खिड़की के पास खींचिए, रोशनी एक तरफ़ से आने दीजिए, और दूसरी तरफ़ सफ़ेद कागज़ या दीवार से शैडो हल्का कीजिए। फ़्लैश बंद रखिए और डिजिटल ज़ूम से बचिए, वह पिक्सल पहले ही काट देता है।
- लेबल की लिखाई क्यों बदल गई?
- छोटे अक्षर कॉपी नहीं होते, दोबारा बनाए जाते हैं, इसलिए वे मिल सकते हैं, गायब हो सकते हैं या बदल सकते हैं। लेबल में ज़रूरी जानकारी हो तो मुख्य इमेज पर असली फ़ोटो रखिए, या लेबल को फ़्रेम में बड़ा करके दोबारा शूट कीजिए।
- मुख्य इमेज सफ़ेद बैकग्राउंड पर ज़रूरी है?
- ज़्यादातर मार्केटप्लेस पहली इमेज पर सादा सफ़ेद या हल्का बैकग्राउंड माँगते हैं, और कई टेक्स्ट, वॉटरमार्क, बॉर्डर व प्रॉप नहीं लेते। हर प्रोडक्ट का एक नियम-अनुरूप वर्ज़न बनाइए और स्टाइल वाले बैकग्राउंड उसके बाद लगाइए।
- एक सोर्स फ़ोटो से कितनी इमेज बनेंगी?
- कई, लेकिन आम तौर पर दो से चार ही पब्लिश करने लायक होती हैं, बाक़ी में मामूली फ़र्क़ होता है। कलर पैलेट और रोशनी की दिशा एक जैसी रखिए। छोटा सेट जो एक ही परिवार का लगे, प्रोडक्ट या पैकेजिंग बदलने पर संभालना आसान रहता है।